लातेहार। मशहूर कवि दुष्यंत कुमार की रचना है ‘कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता, बस एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों’. इन पंक्तियों को लातेहार जिले में 2018 बैच के आईएएस अधिकारी सैयद रियाज अहमद ने अपनी कार्यशैली से चरितार्थ करने का भरपूर प्रयास किया है. दूरदर्शिता, तकनीक और पारदर्शिता का इस्तेमाल कर उन्होंने जिला परिषद के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि की दिशा में पहल की है. उपलब्ध विवरण के अनुसार उनकी पहल से सरकार को सालाना दो करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त आमदनी है. 20 जून 2025 को लातेहार जिला के उप विकास आयुक्त की जिम्मेदारी संभालने के बाद सैयद रियाज अहमद ने सरकारी राजस्व बढ़ाने के लिए मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा शुरू की. उस समय जिला परिषद के अंतर्गत विभिन्न प्रखंडों में संचालित बस पड़ावों और दुकानों से लगभग दो करोड़ रुपये सालाना राजस्व प्राप्त होता था.
ऑनलाइन डाक से बढ़ी प्रतिस्पर्धा, राजस्व में हुई वृद्धि
अगस्त 2025 में बालूमाथ स्थित जिला परिषद बस पड़ाव में निर्मित 11 अतिरिक्त दुकानों को मासिक किराये पर देने के लिए डाक आयोजित की गई. इस दौरान एक दुकान के लिए अधिकतम 7,600 रुपये की बोली लगी, जबकि अन्य दुकानों की बोली निर्धारित न्यूनतम किराये से मामूली अधिक रही. चंदवा बस पड़ाव की दुकानों की डाक में भी इसी तरह की स्थिति सामने आने पर डीडीसी ने पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की. उन्होंने डाक प्रक्रिया को रद्द कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था अपनाने का निर्णय लिया. इसका परिणाम यह हुआ कि दुकानों का मासिक किराया लगभग 1,000 रुपये के स्तर से बढ़कर न्यूनतम करीब 1,700 रुपये और अधिकतम लगभग 8,000 रुपये तक पहुंच गया. इससे दुकानों के किराये से होने वाली आय में बढ़ोतरी का रास्ता खुला और सरकारी राजस्व की बढ़ोतरी हुई.
अवैध रूप से किराये पर देने वालों पर भी कार्रवाई
डीडीसी ने उन दुकानदारों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की. जिन्होंने जिला परिषद से आवंटित दुकानें खुद इस्तेमाल करने के बजाय दूसरे लोगों को किराये पर दे रखी थी. अभियान चलाकर ऐसी दुकानों का आवंटन रद्द कराया गया. सैयद रियाज अहमद का कहना है, कि सरकार रोजगार सृजन के उद्देश्य से दुकानें आवंटित करती है. ऐसे में दुकान हासिल कर उसे किसी अन्य व्यक्ति को किराये पर देना सरकार के उद्देश्य के विपरीत है. जिन लोगों को दुकान की जरूरत नहीं है, उन्हें इसे जरूरतमंदों के लिए छोड़ देना चाहिए.
टेंडर और संवेदक पंजीयन में भी डिजिटल व्यवस्था कराई
जिला परिषद के कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए डीडीसी ने सरकारी दिशा निर्देशों के अनुरूप टेंडर प्रक्रिया का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया. पहले लाभुक समितियों और अन्य माध्यमों से कराए जाने वाले कार्यों पर रोक लगाकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम कराने पर जोर दिया गया. इसके अलावा जिला परिषद में संवेदकों के पंजीयन की प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई. पहले जहां 76 संवेदक जिला परिषद में पंजीकृत थे. पंजीयन की ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होने के बाद 157 नए संवेदक इस व्यवस्था से जुड़े. इससे संवेदकों की भागीदारी बढ़ने और प्रक्रिया में पारदर्शिता आई.
बस पड़ावों की नीलामी होगी ऑनलाइन
डीडीसी सैयद रियाज अहमद के अनुसार आने वाले समय में जिला परिषद की सभी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने की दिशा में काम किया जा रहा है. बस पड़ावों की नीलामी ऑनलाइन कराई जाएगी, ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़े. अनियमितताओं की आशंका कम हो और सरकारी राजस्व में वृद्धि हो सके. कुल मिलाकर लातेहार जिला परिषद में डिजिटल तकनीक और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की यह पहल प्रशासनिक कार्यप्रणाली में बदलाव की मिसाल बन सकती है. यही नहीं अपने पदस्थापना के छह महीने के अंदर ही उप विकास आयुक्त सैयद रियाज अहमद ने कुशल नेतृत्व व कार्य के प्रति अपने समर्पण से लातेहार जिला को मनरेगा में निर्धारित लक्ष्य से अधिक मैन डेज़ सृजित करके राज्य में अव्वल स्थान प्राप्त किया था.