चंदवा के टोरी रेलवे क्रासिंग में फ्लाई ओवरब्रिज नहीं रहने के कारण होती है परेशानी
प्रतिदिन घंटों बंद रहता है रेलवे फाटक, कई बार फंस चुकी हैं एंबुलेंस और रोगी की जा चुकी है जान
लातेहार। केंद्रीय सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्री नीतिन गडकरी तीन जुलाई को झारखंड के दौरे में हैं. श्री गडकरी रांची और गढ़वा में उदघाटन कार्यक्रम में भाग लेगें. श्री गडकरी के झारखंड दौरे के दौरान चंदवा के टोरी रेलवे क्रासिंग में फ्लाई ओवरब्रिज का निर्माण कराने की मांग जोर शोर से उठायी गयी. इस ओर उनका ध्यान आकर्षण कराने के लिए दो दिवसीय पदयात्रा बुधवार व गुरूवार को निकाली गयी. गुरूवार को चंदवा कामता पंचायत के पहनापानी में एक सभा का आयोजन किया गया. इस पदयात्रा का नेतृत्व किसान नेता पंचायत समिति सदस्य अयुब खान कर रहे थे.
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श्री खान ने बताया कि किसानों के इस पदयात्रा का उद्देश्य तीन जुलाई को झारखंड आगमन पर केंद्रीय परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का टोरी फ्लाई ओवरब्रिज की ओर ध्यान खींचना था. किसान केंद्रीय व मुख्यमंत्री का फोटो ले कर गांव गांव घुम रहे हैं. खान ने कहा कि केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ही 03 अप्रैल 2021 को इस फ्लाई ओवर ब्रिज का शिलान्यास किया था. चार वर्ष से अधिक समय हो गया है लेकिन इस दिशा में अब तक कुछ नहीं हुआ. अब तक करीब छह- सात बार टेंडर निकाला गया , लेकिन किसी भी संवेदक ने भाग नहीं लिया. बताया जाता है कि 43 करोड़ में यह परियोजना तैयार नहीं होगा, यह राशि कम है. इधर चर्चा है कि आरओबी की रि-स्टीमिट बनाया गया है और निर्माण की लागत राशि बढ़ा कर करीब 119 करोड़ रूपये की गयी है, लेकिन इस प्राक्कलन को स्वीकृति नहीं मिल पा रही है. फाईल अटका पड़ा हुआ है. फ्लाई ओवरब्रिज का निर्माण शुरू नहीं होने से किसानों और ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. इस एनएच पथ से पटना, छत्तीसगढ़, रांची, गुमला, लोहरदगा, लातेहार, गढ़वा, हजारीबाग, चतरा समेत कई जिलों से छोटी बड़ी बस व अन्य गाडियां प्रत्येक दिन गुजरती हैं. शहर से ले कर ग्रामीण इलाकों की आबादी बुरी तरह प्रभावित हैं, फाटक जाम के कारण हजारों शहर वासी क्रॉसिंग की ओर से जाना बंद कर दिया है. कई बार एंबलेस तक फंस चुकी है और कई रोगियों की जान चली गयी है. पदयात्रा में सनिका मुंडा, रियाज खान, जिरहुलिया देवी, गोबिंद गंझु, दुखन परहैया, बीनोद परहैया, दसवा परहैया, माईकल हंश, मुनेशर परहैया, सनिचर परहैया, बेने मुंडा, बिफइया परहैया, दिवाली परहैया, विजय परहैया, ललुआ परहैया, सुरेन्द्र परहैया, फुलदेव परहैया, अंकिंत परहैया, पंकज कुमार समेत दर्जनों किसान मौजूद थे.