लातेहार। राज्यसभा के नव निर्वाचित सांसद बैजनाथ राम को 26 वर्षों के अपने संसदीय जीवन में तीन बार विधायक व पांच बार मंत्री बनकर राज्यसभा सांसद बनने तक का सफर तय करने में तीन राजनैतिक दलों का साथ मिला है. उन्होंने भाजपा से शुरू हुआ सफर जनता दल यूनाइटेड पुनः भाजपा के रास्ते झारखंड मुक्ति मोर्चा तक तय किया है. इस बीच बैजनाथ राम ने अपने संसदीय जीवन यात्रा में पांच बार विधानसभा चुनाव तीन अलग अलग राजनितिक दलों से लड़कर तीन बार जीत का स्वाद चखा. उन्हें दो बार पराजय का भी सामना करना पड़ा. पांच बार मंत्रिमंडल में उन्हें जगह मिली. राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी से लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के कैबिनेट में सदस्य होने का गौरव उन्हें प्राप्त है. बैजनाथ राम के राजनीतिक जीवन की शुरुआत भाजपा से हुई. उससे पूर्व लातेहार में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में तीन वर्षों तक अध्यापन का कार्य किया. संयुक्त बिहार में 2000 के विधानसभा चुनाव में वे भाजपा से टिकट के प्रबल दावेदार थे. तब लातेहार विधानसभा क्षेत्र के तत्कालीन राजद विधायक बलजीत राम के वाया समता पार्टी भाजपा का दामन थामने के बाद भाजपा द्वारा प्रत्याशी बनाए जाने से निराश भाजपाइयों ने इंदर सिंह नामधारी से संपर्क कर जदयू के टिकट पर प्रत्याशी के रूप में बैजनाथ राम को उतारा था. जिससे जदयू के बागी प्रत्याशी के रूप में बैजनाथ राम चुनाव लड़े थे. राजद के प्रत्याशी प्रकाश राम को 2676 वोट से पराजित कर पहली बार संयुक्त बिहार में विधायक बने. 15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग होने के बाद बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में गठित झारखंड सरकार ने सभी सहयोगी दलों और निर्दलीय सदस्यों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था. सरकार में बैजनाथ राम को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के तहत युवा, कला संस्कृति एवं खेलकूद विभाग का दायित्व सौंपा गया था. 2003 में बाबूलाल मरांडी के खिलाफ हुए बगावत के बाद अर्जुन मुंडा को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर बैजनाथ राम दूसरी बार बतौर मंत्री व पहली बार कैबिनेट मंत्री के रूप मे उत्पाद एवं मद निषेध मंत्री का दायित्व सम्हाले थे. 2004 में केंद्र सरकार के द्वारा मंत्रिमंडल के लिए कुल विधानसभा सदस्यों का अधिकतम पंद्रह प्रतिशत की सीमा तय किए जाने संबंधी कानून अस्तित्व में आने के बाद जदयू ने सरकार को बाहर से समर्थन देने का निर्णय लिया था. जिसके बाद बैजनाथ राम को राज्य पर्यटन निगम लिमिटेड का चेयरमैन (मंत्री का दर्जा प्राप्त) बनाया गया था. 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए प्रत्याशी के रूप में जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे बैजनाथ राम को स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं का नाराजगी का सामना करना पड़ा था. स्थानीय भाजपाइयों के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार फूलचंद गंझू के चुनाव मैदान में उतर जाने से तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की बालूमाथ में हुई चुनावी सभा में टोकरी लेकर स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने जबरदस्त प्रदर्शन कर एनडीए उम्मीदवार बैजनाथ राम के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया था. 2005 के विधानसभा चुनाव में घोषित परिणाम में राजद प्रत्याशी प्रकाश राम ने झामुमो के रामदेव गंझू को लगभग पांच हजार वोटों से शिकस्त देते हुए पहली बार विधायक बने थे. 2007 में बैजनाथ राम ने जदयू छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी. 2009 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने लातेहार विधानसभा क्षेत्र से बैजनाथ राम को प्रत्याशी बनाया था. कांटे के मुकाबले में बैजनाथ राम ने तत्कालीन राजद विधायक प्रकाश राम को 438 वोटों से पराजित कर दूसरी बार विधायक बने. दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नेतृत्व में बनी झामुमो भाजपा गठबंधन सरकार में तीसरी बार बैजनाथ राम को मंत्री बनाया गया और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग मिला था. बैजनाथ राम 2014 का विधानसा चुनाव नहीं लड़े. तब झाविमो प्रत्याशी के रूप में प्रकाश राम दूसरी बार विधायक निर्वाचित हुए थे. 2019 के विधानसभा चुनाव में प्रकाश राम के भाजपा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद बैजनाथ राम ने झामुमो का दामन थाम लिया था. झामुमो ने बैजनाथ राम को अपना प्रत्याशी बनाया था. 2019 में बैजनाथ राम ने भाजपा प्रत्याशी प्रकाश राम को लगभग अठारह हजार वोटों से शिकस्त देते हुए तीसरी बार लातेहार विधायक निर्वाचित हुए थे. 2024 में हेमन्त सोरेन के जेल जाने के बाद चंपाई सोरेन के नेतृत्व में बनी सरकार में बैजनाथ राम को मंत्री बनाए जाने की सारी तैयारियां कर ली गई थी, परंतु अंतिम समय में इन्हें शपथ नहीं दिलाई गई थी. जिससे वे काफी नाराज भी हुए थे. 2024 में हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में बनी सरकार में इन्हें फ़िर से पांचवीं बार बतौर मंत्री शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग में मंत्री बनाया गया था. 2024 के विधानसभा चुनाव में बैजनाथ राम कांटे की टक्कर में भाजपा प्रत्याशी प्रकाश राम से 436 वोट से पराजित हो गए थे. विधानसभा चुनाव में पराजित हो जाने के बाद भी झामुमो केंद्रीय नेतृत्व ने बैजनाथ राम की वरीयता को देखकर केंद्रीय उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा. 2026 के द्विवार्षिक राज्यसभा चुनाव में झामुमो ने बैजनाथ राम को अपना प्रत्याशी बनाकर देश के उच्च सदन में झारखंड का प्रतिनिधित्व करने का अवसर देकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं. बैजनाथ राम दलित समाज से आते हैं. दलित वोटवर्ग के साथ पलामू प्रमंडल का प्रतिनिधित्व मिलने से झामुमो को इस क्षेत्र में विस्तार मिलने की प्रबल संभावना है. तीन टर्म विधायक व पांच बार मंत्री का दायित्व निभाने के बाद राज्यसभा सांसद बनकर लंबा राजनीतिक अनुभव का लाभ क्षेत्र और राज्य को मिलने की भी उम्मीद है.