लातेहार। सामाजिक कार्यकर्ता धोती फादर ने कहा कि वर्ष 2006 वनाधिकार कानून पारित किया था, लेकिन इन 20 सालों में भी इस कानून को सही ढंग से लागू नहीं किया जा सका है. वन विभाग की हठधर्मिता के कारण इस कानून का क्रियान्नवयन नहीं हो पा रहा है. जबकि जिला प्रशासन मूकदर्शक बन कर बैठी है. उन्होने कहा कि आज ग्रामीण यहां वनाधिकार अधिकार पट्टा ले कर ही जायेगें.
फादर मंगलवार को झारखंड जनाधिकार मंच के तत्वावधान में वन प्रमंडल कार्यालय में अनिश्चित धरना प्रदर्शन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. धरना कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंड के वनाधिकारसमिति के सदस्य व लाभुकों पहुंचे थे. इसका नेतृत्व धोती फादर व मुनेश्वर उरांव ने किया.
मौके पर मुनेश्वर उरांव ने कहा कि प्रशासन के द्वारा हर बार आश्वासन दिया जाता है् पिछली बार भी जब समहरणालय के समक्ष धरना दिया गया था, तो आश्वासन दिया गया कि कल से ही वनाधिकार पट्टा का काम प्रारंभ कर दिया जायेगा, लेकिन अभी तक नहीं किया गया. उनेने कहा कि जब वन अधिकार पट्टा के लंबित मामलों का निष्पादन नहीं कर दिया जाता है, तब तक धरना समाप्त नहीं होगा. ग्रामीणों ने पात्र लोगों को वन भूमि का पट्टा देने की मांग की.
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार वनाधिकार कानूून को लागू नहीं कर ही है. ग्रामसभा से पारित कर आवेदन को भेजा जाता है, लेकिन उन्हें अनुमंडल और जिला तक लंबित रखा जाता है. ग्रामीण बर्तन आदि ले कर धरना में पहुंंचे हैं. उनका कहना है कि वे यही खाना बना कर खायेगे और रात में यही सोयेगें. जब तक उन्हें वन पट्टा नहीं मिल जाता है तब तक आंदोलन जारी रखेगें.