लातेहार।झारखंड में झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ (झासा) और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए ) सहित 10 चिकित्सा संगठनों के संयुक्त आह्वन पर मंगलवार को सदर अस्पताल परिसर में चिकित्सकों ने काला बिल्ला लगाकर अपनी मांगों के समर्थन में सांकेतिक प्रदर्शन किया. इस दौरान चिकित्सकों ने मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने, डीएसीपी का लाभ देने और स्वीकृत रिक्त पदों पर नियमित चिकित्सकों की नियुक्ति सहित कई मांगें उठाईं.
मौके पर डॉ सुरेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 15 वर्षों से मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जबकि देश के 27 राज्यों में यह कानून लागू है. उन्होंने नियमित सरकारी चिकित्सकों के लिए केंद्र सरकार और बिहार सरकार की तर्ज पर डीएसीपी तथा स्वीकृत रिक्त पदों से संबंधित व्यवस्था लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि 50 से कम बेड वाले अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिक के संचालन के लिए अनावश्यक कागजी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाना चाहिए. निजी अस्पताल चलाने वाले चिकित्सकों को भी विभिन्न प्रकार के 34 दस्तावेज तैयार करने पड़ते हैं. इससे चिकित्सकों का समय प्रशासनिक कार्यों में खर्च होता है. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि डॉक्टर कागजी प्रक्रिया में ही उलझे रहेंगे, तो मरीजों का इलाज कौन करेगा.
आईएमए सचिव डॉ विवेक विद्यार्थी ने कहा कि मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति नियमावली वर्ष 2015 में बनी थी, लेकिन 11 वर्ष बीतने के बाद भी डायनेमिक एसीपी के लिए नियमावली नहीं बन सकी है. प्रदर्शन में डॉ सरवन कुमार महतो, डॉ हरिओम कुमार, डॉ सीमा रानी, डॉ मार्श टोप्पो और डॉ तोहिद सहित कई चिकित्सक उपस्थित थे. डॉ श्रवण महतो ने कहा कि अगर इस मामले पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 14 अक्टूबर को उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा जायेगा. 21 अक्टूबर को सांकेतिक रूप से कार्य का बहिष्कार किया जाएगा और 22 अक्टूबर को इमरजेंसी को छोड़ कर ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप रहेगी.