लातेहार। जिला परिषद सदस्य विनोद उरांव ने जिला कल्याण विभाग के माध्यम से आदिवासियों के धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं विकास के लिए संचालित योजनाओं में अनियमितता का आरोप लगाया गया है. इस संबंध में उपायुक्त को आवेदन देकर मामले की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है. आवेदन में आरोप लगाया गया है कि झारखंड सरकार की मार्गदर्शिका के तहत सरना स्थल, मसना स्थल, जाहिर स्थान और हड़गड़ी स्थल के संरक्षण के लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं. लेकिन जिला कल्याण विभाग में मिलीभगत से एक ही योजना के नाम पर अलग-अलग मदों में दो से तीन बार राशि की निकासी किए जाने की बात कही गई है. आवेदन में यह भी आरोप है कि जिन गांवों में योजना स्वीकृत की गई है, वहां कई स्थानों पर निर्माण कार्य नहीं कराया गया, जबकि राशि की निकासी कर ली गई. कुछ स्थानों पर बिना कार्य कराए ही पूरी राशि निकाल लिए जाने का आरोप लगाया गया है. श्री उरांव ने कहा है कि एक राजस्व ग्राम में एक ही सरना स्थल होना चाहिए, लेकिन विभाग द्वारा कई स्थानों पर चार-पांच सरना स्थल दिखाकर योजनाएं संचालित की जा रही हैं. गैर-मजरुआ भूमि पर स्थित ऐसे स्थानों के नाम पर भी निर्माण कार्य कराए जाने का आरोप लगाया गया है. आवेदन के अनुसार, सरकार की मार्गदर्शिका में सरना, मसना, जाहिर स्थान और हड़गड़ी स्थल जो खतियान में दर्ज है, वहीं निर्माण कराना का प्रावधान है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा जा रहा है. उन्होंने योजना कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए हैं.आवेदन में ग्राम सभा के गठन और योजना संचालन में फर्जी तरीके अपनाने तथा अध्यक्ष व सचिव के चयन में अनियमितता का भी आरोप लगाया गया है. श्री उरांव ने कई ऐसे योजनाओं से उपायुक्त को अवगत कराया है. शिकायतकर्ता ने उपायुक्त से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित विभाग का पक्ष उपलब्ध नहीं हो पाया है।